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बापू के चरणों में - विनोबा

₹30.00

बापू और विनोबा का सम्बन्ध एक प्रकार से अनिर्वचनीय ही कहा जायेगा। बापू का नाम लेने के बदले, बापू का काम करते रहने को, विनोबाजी सही माने में बापू-स्मरण मानते हैं। जिस व्यक्ति के सम्बन्ध में हृदय में श्रद्धा की पराकाष्ठा का भाव होता है; उस व्यक्ति के सम्वन्ध में शब्दों द्वारा भाव प्रकट नहीं किया जा सकता। विनोबा की स्थिति बापू के सम्बन्ध में क्या थी, इसका जो भी अल्प-शब्द-प्रकटन हुआ है, वह पाठकों के लिए एक बहुत बड़ी थाती है।ऐसी सुरुचिपूर्ण जीवन प्रेरक और चिन्तन प्रधान पुस्तक घर-घर में पहुँचे और पारिवारिक ढ़ंग से पढ़ी जाये, तो राष्ट्रपिता की भावना को जीवन में उतार सकने की शक्ति उपलब्ध हो सकती है।

पृष्ठ : 87
आकार
: डिमाई

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This product was added to our catalog on Sunday 19 May, 2013.