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आत्मज्ञान और विज्ञान - विनोबा

₹50.00

विज्ञान और आत्मज्ञान मिलकर गांधी-ज्ञान होता है। विज्ञान की उन्नति के इस युग में आत्मरज्ञान का कितना महत्व है और दोनों के समन्वय की कितनी आवश्यकता है, यह विनोबाजी के अनुभव और अन्तर्निरीक्षण से सिद्ध किया है। दार्शनिक और वैज्ञानिक अनुभूतियों से परिपूर्ण।

Aatmagyan Aur Vigyan - Vinoba

Pages: 182
Size: Crown
ISBN: 978-93-83982-63-9

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This product was added to our catalog on Wednesday 22 May, 2013.