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जे. पी. की विरासत - आचार्य राममूर्ति

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आचार्य श्री राममूर्तिजी भारत के मूर्धन्य चिन्तकों में से एक हैं। साम्यवाद एवं सर्वोदय के तत्त्वज्ञान पर समान रूप से अध्ययनजन्य अधिकार रखते हैं। दोनों के एक समर्थ भाष्यकार हैं। प्रखर वक्ता तथा कुशल लेखक होने के साथ-साथ अभिजात शिक्षक भी हैं।

इसवी सन् 1954 से राममूर्तिजी बिहार में निवास करते हैं। श्री जयप्रकाशजी से परिचय एवं सम्पर्क होना स्वाभाविक था। सम्पूर्ण क्रान्ति-आन्दोलन उनको जे. पी. के विशेष निकट ले आया। धीरे-धीरे वे जे. पी. के निकटतम सहयोगी बने।  विश्वस्त सहचिन्तक बने।  भारतीय जनता का सौभाग्य है कि राममूर्तिजी ने जयप्रकाश की विरासत को शब्दबद्ध करने का संकल्प किया। अनेकानेक कठिनाइयों के बीच उन्होंने संकल्प पूरा किया।

भारत के स्वाधीनता संग्राम में श्री जयप्रकाशजी का प्रदान अपूर्व रहा। कांग्रेस समाजवादी पक्ष की स्थापना में वे अग्रगण्य रहे।  प्रजा समाजवादी पक्ष के ज्योतिर्धरों में से एक रहे। मानवीय मूल्यों के आराधक, प्रजातंत्र के उपासक और दलितों के हितरक्षक जे. पी. सन् 1955  से 1973 तक सन्त विनोबा के भूदानयज्ञ-आन्दोलन में जीवनदानी लोकनायक बने। जब 1972 में उन्हें प्रतीत हुआ कि देश का प्रशासन अधिनायकवाद का दलदल में फँसता जा रहा है, तो सम्पूर्ण-क्रान्ति का पांचजन्य लेकर वे देशभर में धुमे। सन् 1975 में कारागार में  बन्दी बनाये गये जे. पी. की जेल डायरी एक हृदय-विदारक एवं विचार-प्रवर्तक ग्रंथ है। 1972 से 1977 तक दिये गये उनके लेखों में तथा व्याख्यानों में क्रान्तिकारी लोकतंत्र का सुस्पष्ट दर्शन निखर उठा। लोकतांत्रिक क्रान्ति का नूतन विज्ञान विकसिक हुआ। जन-जन की शक्ति से गाँव में जनता सरकार एवं विधानसभा-लोकसभा में सच्चे लोकप्रतिनिधि पहुँचने का मार्ग जे. पी. ने प्रशस्त कर दिया।

आचार्यजी ने जे. पी. के जीवनकार्य की समुचित समीक्षा की है, विश्लेषण तथा मीमांसा की है। व्यक्तिप्रमाण्य से मुक्त राममूर्तिजी की सशक्त कलम ने एक ऐतिहासिक कार्य किया। लोकतांत्रिक क्रान्ति के विज्ञान को चरितार्थ करने का दायित्व आज के युवावर्ग को उठाना होगा। क्रान्तिकारी लोकतंत्र के प्रतिष्ठा करने की जवाबदेही भी उठानी होगी। यह सन्देश इस ग्रंथ से मिलता है।

कार्ल मार्क्स और महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन की धरोहर को जे. पी. के जीवन कार्य ने कैसे उज्ज्वल बनाया, इसका मनोज्ञ निवेदन इस ग्रंथ में उपलब्ध है।


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This product was added to our catalog on Monday 27 May, 2013.