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जीवन-भाष्य (भाग-1) - जे. कृष्णमूर्ति

₹140.00

श्री जे. कृष्णमूर्ति वर्तमान युग की विश्व-विभूतियों में से एक थे, उन्होंने मानवता को समग्र एवं सर्वांगीण रूप में अनुभव किया तथा जीने की एक नयी चेतना को दिशा दी।

श्रद्धा, विचार, कल्पना, आध्यात्म, अहंकार, चिन्ता, गुरु-शिष्य, राजनीति, महत्त्वाकांक्षा, सद्-गुण, तत्त्वज्ञान, धार्मिक आचार, कर्मकाण्ड, लोभ, क्रोध आदि जीवन की अनेक प्रवृत्तियों, प्रणालियों, परम्पराओं तथा वृत्तियों पर जो चिन्तन कृष्णमूर्तिजी की अनुभूतिपूर्ण वाणी से प्रकट हुई, वह उनका अपना दर्शन है, जो अपने में स्वतंत्र और स्वयंपूर्ण है। मनुष्य जीवन का सार सर्वस्व निश्छल, ग्रंथविहिन सहज वर्तमान में निहित है, यही उनका सन्देश है।

प्रत्येक मनुष्य का जीवन अपने में समुद्र-सा गहन और हिमालय-सा विशाल है। किसी भी परम्परा या लीक पर चलकर मनुष्य स्वतंत्र और सुखी कैसे रह सकता है?

इस कृति के पृष्ठों में झाँकिए तो आप पायेंगे कि यह पुस्तक आप ही के लिए है।

Pages: 314 Size: Demy ISBN: 9789383982363

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This product was added to our catalog on Monday 27 May, 2013.