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तीसरी-शक्ति (अजिल्द) - विनोबा

₹70.00

विनोबाजी द्वारा प्रणित इस पुस्तक में गांधी-विचार के विकास का रूप वर्णित है। गांधीजी के बाद विनोबाजी ने सर्वोदय भूदान-ग्रामदान आदि का रूप में गांधीजी के विचार को जिस रूप में जनता में फैलाया है उसकी विकाशीलता का दर्शण इस रचना में होता है।
हिंसा की विरोधी और दण्ड-शक्ति से भिन्न अहिंसक लोक-शक्ति ही तीसरी शक्ति है।

Pages: 234
Size: Demy

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This product was added to our catalog on Tuesday 28 May, 2013.